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नवजात शिशà¥à¤“ं में सामानà¥à¤¯ सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ की सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿
à¤à¤¾à¤°à¤¤ में नवजात मौतों के पà¥à¤°à¤®à¥à¤– कारण पà¥à¤°à¥€-मेचà¥à¤¯à¥‹à¤°à¤¿à¤Ÿà¥€ / पà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤°à¤® (35 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤) हैं; नवजात संकà¥à¤°à¤®à¤£ (33 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤); इंटà¥à¤°à¤¾-पारà¥à¤Ÿà¤® संबंधी जटिलताà¤à¤‚ / जनà¥à¤® संबंधी à¤à¤¸à¥à¤«à¤¿à¤•à¥à¤¸à¥€à¤… (20 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤); और जनà¥à¤®à¤œà¤¾à¤¤ विकृतियां (congenital malformations) (9 पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¶à¤¤)। हालांकि पहले से के मà¥à¤•ाबले इन की दरों में गिरावट आई है, लेकिन अà¤à¥€ à¤à¥€ काफी गंà¤à¥€à¤° है। ये अधिकांश à¤à¤¾à¤°à¤¤ के उन कà¥à¤› हिसà¥à¤¸à¥‹à¤‚ में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ हैं जहाठअà¤à¥€ à¤à¥€ गैर-संसà¥à¤¥à¤¾à¤—त पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ होते हैं, इसलिठयदि कोई बचà¥à¤šà¤¾ किसी à¤à¥€ आपातकालीन सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ में पैदा हो तो à¤à¤¸à¥‡ में à¤à¤• घंटे का गोलà¥à¤¡à¤¨ टाइम आने – जाने में चला जाता है। à¤à¤¸à¥‡ में फिर उस बचà¥à¤šà¥‡ को बचाना काफी मà¥à¤¶à¥à¤•िल हो जाता है। यह अपने आप में à¤à¤• पूरा विषय है, आज हम इस तरह के उन सà¤à¥€ सामानà¥à¤¯ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤ जो बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के जनà¥à¤® को किसी रूप में पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करते हैं को समà¤à¤¨à¥‡ की कोशिश करेंगे। हम इनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ रोग नहीं बता रहे हैं लेकिन ये रोग के कारण जरूर बन रहे हैं।
पेट की गड़बड़ी – à¤à¤• à¤à¤¸à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ जब पेट अनà¥à¤ªà¤¾à¤¤ से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ बाहर लटक रहा हो। कबà¥à¤œ का बने रहना इसका à¤à¤• लकà¥à¤·à¤£ हो सकता है। बचà¥à¤šà¥‡ का पेट छूने में बहà¥à¤¤ हारà¥à¤¡ हो। इसका मतलब गैस हो सकता है। लेकिन अगर ये सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ बनी रहती है तो यह आंतों के विकार का लकà¥à¤·à¤£ हो सकता है। कोलिक (Colic) के कारण पेट में दरà¥à¤¦ à¤à¥€ हो सकता है। रात में जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° रोने वाले बचà¥à¤šà¥‡ या तो कोलिक (Colic) या सांस लेने में तकलीफ से पीड़ित होते हैं।
जनà¥à¤® के दौरान की चोटें – लंबे समय तक चले पà¥à¤°à¤¸à¤µ के मामलों में शिशॠको चोट लगने की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती है। आमतौर पर किसी à¤à¤• कंधों में। à¤à¤¸à¤¾ डिलीवरी के दौरान खींचने के कारण होता है। यहां हो सकता है – कà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¿à¤•à¥à¤²à¥‡ कà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¿à¤•à¥à¤²
बà¥à¤°à¥‹à¤•न कà¥à¤²à¤¾à¤µà¤¿à¤•à¥à¤² – जिसे तब उपचार के लिठसà¥à¤¥à¤¿à¤° किया जाता है। साइट पर à¤à¤• छोटी सी गांठअचà¥à¤›à¥€ चिकितà¥à¤¸à¤¾ को दरà¥à¤¶à¤¾à¤¤à¤¾ है।
यूनिलैटरल शोलà¥à¤¡à¤° वीकनेस – जà¥à¤¡à¤¼à¤µà¤¾à¤‚ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में सबसे आम है। मांसपेशियों और नरà¥à¤µ सà¥à¤Ÿà¤¿à¤®à¥à¤¯à¥à¤²à¥‡à¤Ÿà¤°à¥à¤¸ के माधà¥à¤¯à¤® से यह बहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦ ही ठीक हो सकता है।
घायल बचà¥à¤šà¥‡ की उचित देखà¤à¤¾à¤² का अà¤à¥à¤¯à¤¾à¤¸ करने की आवशà¥à¤¯à¤•ता है ताकि वे ठीक हो सकें।
डायपर रैश – बेहद सामानà¥à¤¯à¥¤ अपने से या नारियल का तेल लगाने से ठीक हो जाता है। बचà¥à¤šà¥‡ को सूखा और साफ रखें।
डायरिया – बहà¥à¤¤ आम। अपने से ठीक हो सकता है। 6 महीने से ऊपर के शिशà¥à¤“ं में चीनी, नमक और जिंक पानी में मिलकर दें। ताकि बचà¥à¤šà¥‡ को हाइडà¥à¤°à¥‡à¤Ÿà¥‡à¤¡ रखा जा सके।
पीलिया – à¤à¤• महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ लकà¥à¤·à¤£ है जो बिलà¥à¤•à¥à¤² सामानà¥à¤¯ हो सकता है या फिर जटिलताओं à¤à¤°à¤¾ हो सकता है। रकà¥à¤¤ में बिलीरà¥à¤¬à¤¿à¤¨ की अधिकता के कारण पीलिया होता है। यह लिवर के विकास में देरी के कारण होता है। इससे नरà¥à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¤® या मसà¥à¤¤à¤¿à¤·à¥à¤• को कà¥à¤·à¤¤à¤¿ पहà¥à¤à¤š सकता है। इसके लकà¥à¤·à¤£ चेहरे और फिर पूरे शरीर और आंखों पर à¤à¥€ दिखाई देने लगते हैं। अंतरà¥à¤¨à¤¿à¤¹à¤¿à¤¤ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿à¤¯à¤¾à¤‚ फेनिलकेटोनà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ और à¤à¤¬à¥€à¤“ असंगति हो सकती हैं। बà¥à¤°à¥‡à¤¸à¥à¤Ÿ फीडिंग के लिहाज से अचà¥à¤›à¥‡ पोषण के साथ अलà¥à¤Ÿà¥à¤°à¤¾ वॉयलेट लाइट टà¥à¤°à¥€à¤Ÿà¤®à¥‡à¤‚ट में दिया जाता है।
थकान और थकावट – नवजात को आमतौर पर दिन में 12-18 घंटे चाहिà¤à¥¤ लेकिन अगर वे हर समय नींद में रहते हों और à¤à¥‹à¤œà¤¨ करने के बाद थक जाते हों, तो इसका मतलब गंà¤à¥€à¤° बीमारी हो सकता है।
सांस लेने में तकलीफ – जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° शिशà¥à¤“ं को सांस लेने की सामानà¥à¤¯ कà¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ में थोड़ा समय लगता है, लेकिन अगर साà¤à¤¸ कम होती है, तो तेज़ गति के साथ-साथ कंधे की खराबी या कंधे की खराबी बढ़ जाती है, नाक का फड़कना मतलब असà¥à¤¥à¤®à¤¾ या इस तरह के शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° से संबंधित गंà¤à¥€à¤° समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ हो सकती हैं।
खांसी गले की सफाई का à¤à¤• पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक तरीका है, लेकिन यदि यह लकà¥à¤·à¤£ à¤à¥‹à¤œà¤¨ के दौरान कà¤à¥€-कà¤à¥€ गैगिंग के साथ रहता है, तो फेफड़े और पाचन तंतà¥à¤° के में विकार का संकेत हो सकता है।
चिड़चिड़ापन – अगर कोई बचà¥à¤šà¤¾ चिड़चिड़ा है और बिना किसी कारण के रोता है तो यह लगà¤à¤— सà¤à¥€ बीमारियों में मौजूद à¤à¤• लकà¥à¤·à¤£ है।
फोरसेप मारà¥à¤• – चेहरे या सिर पर लाल निशान जो अंततः जनà¥à¤® के à¤à¤• महीने के साथ गायब हो जाते हैं। इस पà¥à¤°à¤•ार के पà¥à¤°à¤¸à¤µà¥‹à¤‚ पर पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤¬à¤‚ध लगा दिया जाता है और इसके बजाय à¤à¤• वैकà¥à¤¯à¥‚म का उपयोग किया जाता है जो बचà¥à¤šà¥‡ के लिठकोई जोखिम को कम करता है।
बà¥à¤²à¥‚ बेबीज़ – ठंड की वजह से हो सकता है, लेकिन अगर सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ कान और नाखूनों में बदलाव के साथ बनी रहती है, तो यह दिल की खराबी का संकेत है। यदि बचà¥à¤šà¥‡ को सांस लेने और दूध पिलाना में कठिनाई होती है तो ततà¥à¤•ाल चिकितà¥à¤¸à¤¾ की आवशà¥à¤¯à¤•ता हो सकती है।
यदि इनमें से कोई à¤à¥€ सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ 2-3 दिनों से अधिक समय तक बनी रहे तो चिकितà¥à¤¸à¤¾ सहायता लेनी चाहिà¤à¥¤
यहाठहमने शिशॠमें होने वाले सà¤à¥€ परेशानियों को कवर करने का पà¥à¤°à¤¯à¤¾à¤¸ किया है। इनमें से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾à¤¤à¤° हलà¥à¤•े होते हैं और समय के साथ ठीक हो जाते हैं, इनके बारे में जानना महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ है, वे कैसे पà¥à¤°à¤•ट होते हैं, कब किसी चिकितà¥à¤¸à¤¾ सहायता की आवशà¥à¤¯à¤•ता होती है। इन सब के बारे में जानना इनको ठीक करने की दिशा में à¤à¤• बड़ा कदम है।
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